करोड़ों रूपए का जलटंकी बनी शोभा की वस्तु!
बिक्रमपुर-थालपोता में पेयजल संकट, सड़कों पर बह रहा पानी
निजाम खान। अबुआ नेटवर्क टीवी
जामताड़ा। कुंडहित प्रखंड के बिक्रमपुर और थालपोता गांवों में ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार ग्रामीण जलापूर्ति योजना के बावजूद उन्हें नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है। वहीं, दूसरी ओर जलटंकी से छोड़ा जाने वाला पानी जगह-जगह लीकेज और अधूरे नल कनेक्शन के कारण सड़कों पर बह रहा है।
थालपोता में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत 1 लाख 15 हजार लीटर क्षमता वाली जलटंकी का निर्माण कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, नाला विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो के प्रयास से वर्ष 2022 में इस जलटंकी का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था।
लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलटंकी से पानी की आपूर्ति तो की जाती है, लेकिन वह बेहद कम समय के लिए होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार करीब 10 मिनट तक ही पानी छोड़ा जाता है, जिसके बाद पानी का एक बड़ा हिस्सा रास्तों में बह जाता है।
अधूरे नल कनेक्शन को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों का दावा है कि बिक्रमपुर और थालपोता में अब तक करीब 30 प्रतिशत घरों में ही नल कनेक्शन का काम सही तरीके से पूरा हुआ है। वहीं करीब 30 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन का काम आधा-अधूरा है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत घरों में अब तक नल कनेक्शन का काम नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब घरों तक नल कनेक्शन ही पूरी तरह नहीं पहुंचा है, तो नियमित पेयजल आपूर्ति का लाभ सभी परिवारों को कैसे मिलेगा?
सड़क पर बह रहा पानी, ग्रामीण परेशान
इलाके में जगह-जगह लीकेज के कारण पानी सड़कों पर बहता नजर आता है। इससे कई स्थानों पर कीचड़ जैसी स्थिति बन जाती है और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है।उल्लेखनीय है कि दूनियाभर में पीने योग्य पानी मात्र 0.3 प्रतिशत है यानी 1 प्रतिशत से भी कम।ऐसे में इस तरह पीने के पानी का रास्ता में बह कर बर्बाद होना चिंतनीय विषय कहने से इंकार नही किया जा सकता है।
एक तरफ ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं, तो दूसरी तरफ उपलब्ध पानी के सड़कों पर बहने और बर्बाद होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी महत्वपूर्ण सुविधा में इस तरह की कथित लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
टंकी पर लिखे कार्य पूर्ण वर्ष को लेकर भी सवाल
इस पूरे मामले में जलटंकी के गेट पर लिखा गया कार्य पूर्ण होने का वर्ष भी चर्चा का विषय बना हुआ है। गेट पर वर्ष का अंक 202 दिखाई दिया और इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अंतिम अंक मिट गया है या इसे जानबूझकर हटाया गया है।गौरतलब है कि मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024 तक में कार्य पूर्ण होना की बात थी।
हालांकि, इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने उपायुक्त से जांच की मांग की
पेयजल व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने जामताड़ा उपायुक्त से मामले की जांच कराकर समस्या का समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि सभी घरों में शत-प्रतिशत नल कनेक्शन का काम पूरा कराया जाए और लोगों को प्रतिदिन नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
विभाग से संपर्क का प्रयास, नहीं हो पाया संपर्क
इस मामले को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राम प्रसाद राम से पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
अब सवाल यह है कि ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत बनी इस जलटंकी से ग्रामीणों को नियमित पेयजल कब तक मिलेगा? अधूरे नल कनेक्शन का काम कब पूरा होगा? और सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहे पानी को रोकने के लिए विभाग कब ठोस कदम उठाएगा?
फिलहाल ग्रामीणों को विभाग की कार्रवाई और आधिकारिक जवाब का इंतजार है।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों की पेयजल समस्या का समाधान कब तक होता है। यदि विभाग या संबंधित संवेदक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आता है, तो उसे भी आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।








