दुमका में रेशम आधारित आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने उद्योग विभाग के रेशम कार्यालय परिसर में सिल्क वस्त्रों पर ब्लॉक प्रिंटिंग एवं वैल्यू एडिशन कार्य के ट्रायल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न कार्य एजेंसियों के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
उपायुक्त ने कहा कि अब तक जिले में मुख्य रूप से रेशम के कोकून उत्पादन पर कार्य होता रहा है, लेकिन अब सिल्क वस्त्रों पर ब्लॉक प्रिंटिंग, जादोपटिया पेंटिंग, कांथा स्टिच और अन्य कलात्मक कार्यों के माध्यम से साड़ी, शॉल तथा अन्य परिधानों का निर्माण किया जाएगा। इससे स्थानीय सिल्क उद्योग को नई पहचान मिलेगी और उत्पादों के लिए व्यापक बाजार भी तैयार होगा।
उन्होंने बताया कि इस पहल से जिले की करीब 200 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आजीविका का अवसर मिलेगा। तैयार उत्पादों के विपणन के लिए झारक्राफ्ट के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकें।
इस परियोजना को सफल बनाने के लिए मयूराक्षी सिल्क, झारक्राफ्ट, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस), रेशम विभाग और सेंट्रल सिल्क बोर्ड संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। स्थानीय कारीगरों की पारंपरिक कला और कौशल के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले सिल्क उत्पाद तैयार कर दुमका को सिल्क उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।









