दुमका के कन्वेंशन हॉल में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दुमका सांसद नलिन सोरेन सहित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। महोत्सव में आदिवासी भाषा, साहित्य, कला, संगीत, नृत्य, परंपरा और संस्कृति की समृद्ध झलक देखने को मिली।
सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली में है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि संताल परगना वीरों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की धरती है। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और बिरसा मुंडा के संघर्ष से प्रेरणा लेकर समाज को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार एवं जिला प्रशासन आदिवासी समुदाय के विकास, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
महोत्सव में छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति दी। ट्राइबल फैशन शो, लघु नाटक और बैंड प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए साहित्य, कला, खेल और कृषि से जुड़े प्रतिभावानों को सम्मानित किया गया। लाभुकों के बीच सरकारी योजनाओं के तहत परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया।









