झारखंड आंदोलन के वरिष्ठ साथी शिकार मरांडी का निधन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने जताया शोक
जामताड़ा: झारखंड आंदोलन के पुराने एवं समर्पित आंदोलनकारी शिकार मरांडी के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार सुबह करीब 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे जामताड़ा जिले के कुंडहित प्रखंड अंतर्गत कालीपाथर गांव के निवासी थे।
उनके निधन पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए शोक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि शिकार मरांडी का निधन झारखंड आंदोलन के एक समर्पित और संघर्षशील साथी का बिछड़ना है। अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए उन्होंने स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड आंदोलन का इतिहास ऐसे अनेक गुमनाम सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान से बना है, जिन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राज्य और यहां के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। शिकार मरांडी का योगदान हमेशा याद किया जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की तथा शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं शक्ति प्रदान करने की कामना की।








